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ऋग्वेद में अमृत ज्ञान-कार्तिक कुमार

खाली समय में ऋग्वेद पढ़ें,
ज्ञान सुधा से मन को गढ़ें।
ऋषियों की वाणी अमृत बनकर,
जीवन में नवदीप जलाएँ।
सत्य-अहिंसा का पथ लेकर,
मानवता का फूल खिलाएँ।
संस्कारों की पावन गंगा,
हर आँगन में बहती जाए।
जीवन को उन्नत बनाएँगे,
हर हृदय में प्रेम जगाएँगे।
लोभ-मोह के अंधियारे को,
ज्ञान सूर्य से दूर भगाएँगे।
समाज को सुखी बनाएँगे,
मिल-जुलकर दीप जलाएँगे।
दीन-दुखी के अश्रु पोंछकर,
मानव धर्म निभाएँगे।
स्वर्ग से सुंदर धरती होगी,
जब मन में सद्भाव जगेगा।
नफरत की दीवारें टूटेंगी,
प्रेम का उपवन फिर खिलेगा।
संस्कार की बगिया में हम,
सद्गुण के फूल उगाएँगे।
बच्चों को ऋषियों की बातें,
गीतों में हम सिखलाएँगे।
बच्चों को स्वर्ग भूमि ले जाकर,
चरित्र महान बनाएँगे।
माँ-बाप गुरु का मान सिखाकर,
भारत का गौरव बढ़ाएँगे।
सचमुच जीवन अच्छा होगा,
जब मन निर्मल हो जाएगा।
हर घर में वेदों की वाणी,
सुख-शांति का दीप जलाएगा।
ऋग्वेद का संदेश अमर है,
सद्बुद्धि का सुंदर आधार।
जो इसके पथ पर चल देगा,
जीवन होगा उज्ज्वल-साकार।
आओ मिलकर प्रण यह लें हम,
ज्ञान दीप घर-घर जलाएँ।
खाली समय में ऋग्वेद पढ़ें,
और जग को राह दिखाएँ।

कार्तिक कुमार

मध्य विद्यालय कटरमाला

गोरौल वैशाली 7004318121

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