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सावन का संदेश.. उमेश कुमार सिन्हा



मौसम ने संदेश सुनाया है,
सावन धरा पर आया है।
मानव, पशु, पक्षी सबने मिल,
हर्षित मन से गाया है।

नव पल्लव, नव हरियाली देख,
मन का संशय दूर हुआ।
धरती माँ की हरित चुनरिया,
देख प्रकृति भरपूर हुआ।

मोर नाचते पंख पसारे,
कोयल मधुरिम गान सुनाए।
वन-उपवन पुलकित होकर,
सावन का अभिनंदन गाए।

बादल भी संकल्प लिए हैं,
धरती का उपकार करेंगे।
अमृत-सी वर्षा बरसाकर,
सूखे मन में प्राण भरेंगे।

खेतों में नर-नारी देखो,
धान की रोपाई करते हैं।
निःस्वार्थ कर्म देखकर मेघ,
झूम-झूमकर बरसते हैं।

फूल-कलियाँ मुस्काती हैं,
सुगंधित पवन बहाती हैं।
रंग-बिरंगे पुष्पों संग,
हरियाली मन लुभाती है।

झूले पड़ते डाल-डाल पर,
मंद समीर तान सुनाए।
लोकगीत गाकर बहुरियाँ,
सावन का स्वागत करवाए।

काँवड़ियों की गूँज दिशाओं में,
“बोल बम” का जयघोष हुआ।
गंगाजल से शिव-अभिषेक,
भक्ति-भाव का जोश हुआ।

मंगलवार को हनुमत मंदिर,
मनभावन भोग चढ़ाया जाए।
तन-मन महके दीपक जलें,
सावन का सत्कार मनाए।

हरी चूड़ियाँ, रंगीन लहँगे,
नाचें गाँव-शहर की नारियाँ।
हँसी-खुशी से झूम उठें सब,
सजें सुहागिन बहुरानियाँ।

जब सावन विदा हो जाता,
एक संदेश अमर दे जाता—
भाई-बहन का पावन बंधन,
जीवन भर मुस्काता जाता।

निर्देशक
डिसेंट एकेडमी बाया स्कूल तुलसीपथ लालापुल ,रघुनाथपुर
अंचल- ब्रह्मपुर (ब्रह्मेश्वर धाम)
जिला – बक्सर

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