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थाली का इतराना-उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक 

श्रावण की पूर्णिमा देख,

थाली चाँद पर इतराती है—

“देखो, कैसा चाँद मेरा शक्ल बनाया है!”

राखी के त्योहार पर बहन पर चाँदनी की

आभा बिखेरने, राखी बँधवाने आया है।

थाली ने किया बर्तनों से गपशप—

“मेरा आज मान बढ़ेगा,

इस रक्षाबंधन में मेरे ऊपर

रोरी, चंदन, मिष्ठान चढ़ेगा।”

दीपक भी इतराकर आया,

बोला—

“मैं तेरी नज़र उतारूँगा।

आज इस पवित्र पर्व पर

बहन के हाथों भाई की नज़र उतारूँगा।”

रोरी भी थाली में बैठ

भाई की राह तकता था।

रोरी ने सचेत किया मिष्ठान को—

“पहले मुझे तिलक लग जाने देना,

तब तुम भाई का मुँह मीठा करना।”

थाली चाँद पर इतराती है—

“देखो, चाँद मेरा शक्ल बनाया है!”

सारे बर्तनों ने बधाई दी थाली को,

क्योंकि थाली ने सभी बर्तनों का मान बढ़ाया।

भाई-बहन के इस पावन पर्व में

इन दोनों के साथ रिश्ता निभाएगी।

पगड़ी बोली चुनरी से—

“मैं नहा-धोकर साफ हो गया,

अब तू भी तैयार हो जाना।

आज मैं भाई की शोभा बनूँगा,

तू बहन से लिपट जाना।”

साल भर के इस त्योहार पर

राखी से भाई की कलाई की शोभा बढ़ाना।

रुपए-पैसे का हाल न पूछो,

भाई की जेब में इठलाते हैं।

“बहन के घर जाना है”—

कह-कहकर जेब में उमंग उड़ाते हैं।

सब मिलकर बहन की ओर से

भाई के अमर जीवन की दुआ माँगते हैं।

बहन की आँखों में नूर समा जाता है,

भाई के राखी बाँधने से बहन के

जीवन में शकुन आ जाता है।

और भाई-बहन का पवित्र प्रेम

सालों भर ठहर जाता है—

भाई-बहन के अनमोल रिश्तों की

परिभाषा समझाता है।

भाई – बहन के पावन पर्व पर

सिन्हा जी की कलम पन्नो पर लिख ,अपना भाव लिख देती है !

रक्षा – बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं 

इस कविता में रक्षाबंधन के पावन पर्व और भाई-बहन के स्नेहपूर्ण रिश्ते को सुंदर एवं कल्पनाशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कवि ने राखी की थाली में रखी विभिन्न वस्तुओं—रोली, चंदन, मिष्ठान, दीपक, पगड़ी और चुनरी—को मानवीय रूप देकर उन्हें आपस में बातचीत करते हुए दिखाया है।

श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर सजी हुई थाली अपने सौंदर्य और महत्त्व पर प्रसन्न होती है। रोली भाई के माथे पर तिलक लगाने के लिए उत्सुक है, मिष्ठान उसका मुँह मीठा कराने की प्रतीक्षा कर रहा है और दीपक भाई की आरती उतारने के लिए तैयार है। पगड़ी और चुनरी भी इस पवित्र अवसर पर भाई-बहन की शोभा बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं।

कविता में भाई के बहन के घर जाने की खुशी, उसकी जेब में उमंग और बहन की आँखों में भाई के प्रति प्रेम को भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया गया है। राखी बाँधने का यह अवसर केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह, सम्मान और मंगलकामना का प्रतीक है।

अंततः कविता यह संदेश देती है कि रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और मजबूत करता है तथा उनके बीच प्रेम, विश्वास और अपनापन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

स्वरचित , मौलिक रचना

रचनाकार:-

उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक 

डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर 

अंचल – ब्रह्मपुर जिला – बक्सर

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