सारी नाउम्मीदी, उलझनों, चिंताओं को किनारे रखकर,
एक बार उठो तो सही!
पता है कि रास्ते में आती हैं मुश्किलें हजार
कोई बात नहीं; घबराना, रुकना या हारना क्यों!
तुम बदल दो अपने रास्ते तुरंत
लेकिन चलो तो सही!
तुमने पढ़ी है वरदराज की कहानी मेहनत करने की जब उसने ठानी,
बन बैठा एक महान विद्वान
जो गया था खुद से हार मान!
बस यही सोचकर चलना होगा
कुछ भी हो रुक नहीं सकते कदम,
डगमगा भी जाएंगे कहीं गर ये ,
तुम्हें संभालने आयेंगे कई हाथ !
खुद पर विश्वास करो तो सही,
धीरे धीरे ही.तुम चलो तो सही।
स्वरचित
अमृता कुमारी
विद्यालय अध्यापक
उच्च माध्यमिक विद्यालय बसंतपुर, सुपौल
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