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तुम हो तो बसंत है-मनु कुमारी

Manu Raman Chetna

Manu Raman Chetna

तुम हो तो बसंत है, वरना मौसम रूठ जाते हैं,

तुम्हारी हँसी से पतझर भी गीत गुनगुनाते हैं।

तुम्हारा साथ मिले तो राहें मुस्कुराती हैं,

अधूरी-सी ज़िंदगी भी पूरी हो जाती है।

तुम्हारी आँखों में ठहरता है मेरा हर सपना,

तुम्हारे नाम से ही धड़कता है दिल का अपना।

तुम बोलो तो शब्दों को अर्थ मिल जाता है,

तुम चुप रहो तो भी सब कुछ कह जाता है।

तुम हो तो उजाला है हर एक अँधेरे में,

तुम हो तो भरोसा है टूटते सवेरे में।

तुम साथ हो तो हर दर्द भी गीत बन जाता है,

तुम हो तो बसंत है—जीवन महक जाता है।

तुम्हारे होने से ही साँसों को लय मिलती है,

तुमसे ही हर धड़कन को नई पहचान मिलती है।

तुम दूर भी रहो तो पास होने का एहसास है,

तुम हो तो हर पल ही प्रेम का विश्वास है।

स्वरचित एवं मौलिक 

मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी 

राघोपुर, सुपौल

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