Site icon पद्यपंकज

विलुप्त हो गई गौरैया-नीतू रानी

Nitu Rani

Nitu Rani

गौरैया दिवस मनाइए, 

गौरैया को घर में बसाइए।

जब से बना पक्का का मकान,

गौरैया की उड़ गई मुस्कान।

घर से हो गई बेघर गौरैया,

वन- वन भटक रही गौरैया।

फूस के घर में रहती थी गौरैया,

सपरिवार के साथ खुश थी गौरैया।

सुबह सबेरे उठती थी गौरैया,

घर आंगन में फुदकती थी गौरैया।

फूस के घर के किसी कोने में,

अपना घर बना कर रहती थी गौरैया।

जब से फूस का घर है टूटा,

तब से विलुप्त हो गई गौरैया।

अब कब मेरे घर दाना चुगने,

आएगी छोटी प्यारी गौरैया।

बिहार के राजकीय पक्षी है गौरैया,

रोज दाना पानी देना इसे मैया।

नीतू रानी, विशिष्ट शिक्षिका

स्कूल -म०वि० रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version