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युद्ध नहीं जिनके जीवन में-कार्तिक कुमार

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युद्ध नहीं जिनके जीवन में, वह तो बड़े अभागे होंगे।

या तो प्रण को तोड़े होंगे, या तो रण को छोड़े होंगे।।

जीवन का हर श्वास समर है, हर पल नई चुनौती है,

वीरों की पहचान सदा ही, साहस, श्रम और दृढ़ता होती है।

जो अंगारों पर चलते हैं, वे ही शीतल छाँव रचाते,

जो विष पीकर भी हँसते हैं, अमृत का संदेश सुनाते।

सिंह दहाड़े विपदा में भी, कायर पग पीछे हटते हैं,

रणभूमि के सच्चे राही, इतिहासों में बसते हैं।

तलवारों से बढ़कर होती, सत्य-व्रतों की धार प्रखर,

धर्म-पथिक झुकते कब हैं, चाहे टूट पड़े अंबर।

लक्ष्य वही पाता जग में, जिसने श्रम को पूजा माना,

अपने रक्त-पसीने से ही, भाग्य का लेख स्वयं पहचाना।

हार नहीं अंत कहानी का, यह तो नव अभियान बने,

हर ठोकर से शक्ति मिले और हर आँसू वरदान बने।

जब तक प्राणों में ज्वाला है, तब तक पथ मत छोड़ो तुम,

मातृभूमि के गौरव हित में, अपना सर्वस्व जोड़ो तुम।

संघर्षों से जो नाता जोड़ें, उनका यश अमर हो जाता,

युग-युग तक उनके चरणों में, सारा भारत शीश झुकाता।

कार्तिक कुमार

मध्य विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली 704318121

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