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अंगिका कविता ‘नानी घर जैबय’

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नानी घर जैबय

अबकी गरमी छुट्टी हमहु,
नानी घर जैबय।
नानी-नाना साथे हमहु,
नदी में नहैबय।।

नदी में नहैबय अउरो,
खूब डुबकी लगैबय।
अबकी गरमी छुट्टी हमहु,
नानी घर जैबय।।

आलथि-पालथी मारी हम्मे,
झोर-भात खैबय।
औरों मामा साथे हम्मे,
लटुआ नचैबय।।

लटुआ नचैबय अउरो हम्मे,
गुड्डी भी उरैबय।
अबकी गरमी छुट्टी हमहु,
नानी घर जैबय।।

नाना साथे-साथ हमहु,
खेत पर जैबय।
मेड़ पर बइठि हम्मे,
ताड़ कुआ ख़ैबय।।

ताड़ कुआ ख़ैबय हम्मे,
गैय्या भी चरैबय।
अबकी गरमी छुट्टी हमहु,
नानी घर जबैय।।

माय सन मौसी साथे,
खूब लाड़ लगैबय।
आम और इमली के भी,
चटकारा लेके ख़ैबय।।

चटकारा लेके ख़ैबय जामुन,
गाछी से तोड़ी लैबय।
अबकी गरमी छुट्टी हमहु,
नानी घर जैबय।।

अँगना बीचे रतिया हमहु,
खटिया बिछैबय।
चन्ना मामा साथे हमहु,
आकाश घूमी ऐबय।।

आकाश घूमी ऐबय हम्मे,
बिहाने जगी जैबय।
अबकी गरमी छुट्टी हमहु,
नानी घर जैबय।।

कुमकुम कुमारी
प्राभारी प्रधानाध्यापक
मध्य विद्यालय बाँक, जमालपुर
मोबाईल न०-7004103516

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Kumkum Kumari

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