पद्यपंकज padyapankaj मनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम

मनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम


S K punam

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मनहरण घनाक्षरी

तप गई आज धरा,
धूल संग चली हवा
बढ़ गई गर्मी धूप,घर में छुप जाए।

प्रातःकाल उठ कर,
नित्य दिन सैर कर,
सुबह में पेट भर,फल-फूल ही खाए।

नाना नानी परेशान,
खोज-खोज हलकान,
बच्चों को पकड़ कर,नाना जी नहलाए।

अमिया के पेड़ पर,
आम तोड़े छिप कर,
सखा संग मौज करे,चंचल कहलाए।

एस.के.पूनम

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