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अनजान रिश्ते- नीतू रानी

Nitu Rani

Nitu Rani

अनजान रिश्ते
जल्द रिश्तों में बदल गए,
न कभी देखा न कभी जाना
हाय दैया रिश्ते में मेरे पति बन गए।

स्कूल में बैठी थी कुर्सी पर
सुन रही थी बच्चों से गीत,
अचानक अनजान रिश्ते आए
जिनसे जुड़ गई मेरी प्रीत।

प्रधान की तरफ से चली चाय नाश्ता
शादी की होने लगी बातचीत,
२६ जून २००८ को अनजान रिश्ते से
शादी की तारीख हो गई फिक्स।

चले स्कूल से जब हम अपने घर
अनजान रिश्ते भी धर लिए मेरे साथ,
हाय दैया शर्म के मारे
थर -थरा रहे थे मेरे पैर और हाथ।

जब हम अपने घर पहुंचे
देखा अनजान रिश्ते को सब मेरे साथ,
सभी पूछने लगे उनसे
आप कौन हैं जो आए हैं नीलम के साथ।

अनजान रिश्ते ने बतलाया
हमारी इनसे शादी की हो रही है बात,
अब तो आना जाना लगा हीं रहेगा
बस आप सबों का चाहिए आशीर्वाद।

झट मंगनी पट ब्याह हो गई
चले हम अपने ससुराल,
अनजान रिश्ते से ब्याह करके

हाय दैया मना लिए हम सुहागरात।

नीतू रानी
स्कूल -म०वि०सुरीगाँव
प्रखंड -बायसी
जिला -पूर्णियाँ बिहार।

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