जब थककर बैठ गए थे हम,
और लगा — अब आगे क्या?
तब किसी ने धीरे से आकर
कहा —
“चलो, अभी रास्ता है बचा।”
एस० एल० डी० से जूझते बच्चों को,
जब दुनिया कमतर आँक रही थी,
तब किसी ने उनके भीतर
उम्मीदों की दुनिया झाँक रही थी।
मुज़फ्फरपुर की गलियों में फिर
मेहनत की आहट सुनाई दी,
काग़ज़ों के पीछे छुपी साधना ने
रातों की नींद भी भुला दी।
श्री सुजीत कुमार दास सर का
मार्गदर्शन बना हमारा विश्वास,
जब हौसले डगमगाए थे,
उनकी बात बनी हमारी साँस।
ज़िला टीम, ब्लॉक टेक्निकल टीम,
और हर एक शिक्षक साथी,
हर बैठक में तपती मेहनत,
हर निर्णय में बच्चों की ही चाह।
आज जो “नं. 1” बना हमारा ज़िला,
वह सिर्फ़ आँकड़ों की जीत नहीं,
यह उन अनकहे आँसुओं की कहानी है,
जो मुस्कानों में ढल गए कहीं।
विवेक की ओर से नमन-धन्यवाद,
हर उस हाथ को आज ससम्मान,
जिन हाथों ने अँधेरों में भी
जलाए
उम्मीद के दीये महान। 🙏✨
— सादर,
विवेक कुमार
भोला सिंह उच्च माध्यमिक विद्यालय,
पुरुषोत्तमपुर, कुढ़नी, मुज़फ्फरपुर
विवेक कुमार


