आज पुनि जग कान्ह पुकारै,
आओ नंदकुमार।
प्रेम-प्रकाश जगत में भर दो,
मिटै सकल अँधियार॥
मथुरा-कारा जन्म तुम्हारो,
गोकुल भयो उजियार।
आज पुनि मानवता रोवत है,
सुनि ले नंदकुमार॥
जाति-पाँति के भेद भुलाओ,
टूटैं मन के तार।
नर हो, नारी हो, सबमें देखो,
एकहि प्रभु के प्यार॥
दोहा
जाति-पाँति अरु ऊँच-नीच, सब मिथ्या अभिमान।
जिनके हिय में प्रेम है, तिनमें बसैं भगवान॥
झूठ-कपट अरु द्वेष मिटाओ,
सत्य-धर्म अपनाओ।
दीन-दुखी के नैनन के नीर,
अपने नैन बहाओ॥
जिसके आँगन भूख खड़ी हो,
कैसी तब जयकार?
सेवा में ही श्याम मिलेंगे,
सेवा सच्चो सार॥
गौमाता की पुकार
गौमाता की करुण पुकार सुन,
आओ घनश्याम दुलार।
जिसके संग तुम वन-वन डोले,
आज वही लाचार॥
दूध दिया, गोबर से धरती,
दी जीवन को खाद।
गौ-सेवा को धर्म बनाओ,
यही कृष्ण का प्रसाद॥
चौपाई
गौ अरु गंगा, वन अरु पानी।
इनसे धरती होत सुहानी॥
इनकी रक्षा धर्म हमारा।
इन बिन सूना जग संसारा॥
वन कटते हैं, नदियाँ सूखीं,
धरती माँ बेहाल।
कान्हा! फिर गोवर्धन बनकर,
कर दो जग खुशहाल॥
कंक्रीटों के जंगल बढ़ते,
सूखत जल की धार।
वृक्ष लगाओ, जल बचाओ,
यही समय की पुकार॥
दोहा
एक वृक्ष दस पुत्र सम, संतति जैसी छाँह।
जिसने वृक्ष बचाय हैं, बची उसी की राह॥
यमुना मैया मैली होती,
कहाँ रही वह धार?
कदंब तले फिर बाँसुरी बजाओ,
श्याम! करो उद्धार॥
नदिया केवल जल नहिं होती,
जीवन की आधार।
नद-वन-पर्वत बचें जगत में,
तभी बचे संसार॥
गोवर्धन की सीख
गोवर्धन की सीख सुनाओ,
गिरिधर! आज समाज।
प्रकृति हमारी माता है रे,
मत कर उसका नाश॥
पर्वत, वन, सरिता, पशु-पंछी,
सबमें तेरो वास।
जिसने प्रकृति बचाई कान्हा,
उसने बचाई साँस॥
पद
जल की हर बूँद अमोलक जानो,
व्यर्थ न बहने दो।
सूखी धरती के अधरों पर,
जीवन-रस रहने दो॥
आँगन-आँगन वृक्ष लगाओ,
हरित धरा मुसकाय।
पवन बने फिर निर्मल-शीतल,
कोयल गीत सुनाय॥
ओज-पुकार
नहीं चाहिए वैर-विरोध अब,
नहीं चाहिए घृणा।
प्रेम बने जीवन का दीपक,
मिटे मनों की तृष्णा॥
हाथ मिलें तो देश सँवरेगा,
दिल मिलें तो गाँव।
भाईचारे की गंगा बहती,
फिर हर ओर प्रभाव॥
नारी-नर में भेद न मानो,
दोनों जग की शान।
जिस घर नारी पूजित होती,
वहीं बसें भगवान॥
समापन पद
आओ मिलकर व्रत यह लें हम—
धरती न हो लाचार।
गौ, गंगा, वन, जीव बचाएँ,
यही कृष्ण को प्यार॥
प्रेम बाँटें, जल को बचाएँ,
वृक्ष लगाएँ चार।
सेवा, सत्य, अहिंसा लेकर,
चलें कृष्ण की धार॥
आज पुनि जग कान्ह पुकारै,
आओ नंदकुमार।
मानवता के मन-मंदिर में,
जलाओ प्रेम अपार॥
लोभ-मोह के जाल मिटाकर,
कर दो जग उजियार।
गौ-वन-गंगा-धरती बचें तो,
सफल हो जनम तुम्हार॥
जय कन्हैया लाल की!
जय गौमाता!
जय धरती माता!
राकेश कुमार, मध्य विद्यालय अमौना

