दस सिरों का रावण – राकेश कुमार दशहरा आया, शंख बजाओ, गूँजे जय-जयकार, मन के रावण को भी मारो, यही[...]
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आज पुनि जग कान्ह पुकारै- राकेश कुमारआज पुनि जग कान्ह पुकारै- राकेश कुमार
आज पुनि जग कान्ह पुकारै, आओ नंदकुमार। प्रेम-प्रकाश जगत में भर दो, मिटै सकल अँधियार॥ मथुरा-कारा जन्म तुम्हारो, गोकुल भयो[...]
गुरु की हुंकार-राकेश कुमारगुरु की हुंकार-राकेश कुमार
गुरु ज्ञान का दीप जले, भारत का तम दूर चले। कक्षा फिर से मुक्त बने, बालक में विश्वास जगे। गुरु[...]
