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आकृतियों का अनोखा खेल – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

आकृतियों का अनोखा खेल – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

 

आओ बच्चों तुम्हें सिखाएं,

आकृतियों की दुनिया घुमाएं।

तरह-तरह के आकार हैं होते,

मिलकर सुंदर चित्र संजोते।

गोल-गोल जब पहिया चलता,

घड़ी का चेहरा भी है सजता।

इसको कहते हैं गोलाकार,

गोल-मटोल है यह आकार। ⭕

तीन कोनों से बनता त्रिभुज,

जोकर की टोपी में है यह खुश।

पेड़ का आकार भी देखो ऐसा,

सुंदर प्यारे तिकोने जैसा। 🔺

शतरंज का बोर्ड है बिल्कुल चौकोर,

चारों भुजाएं बराबर हर ओर।

यह सुंदर आकार है वर्गाकार,

खेलने में आता मज़ा अपार। 🔲

लंबा-चौड़ा पोस्टकार्ड हमारा,

फ़ोटो फ़्रेम भी लगता प्यारा।

आमने-सामने की भुजाएं बराबर,

कहते हैं इसे आयताकार मनहर। rectangles

अंडे जैसा जो लंबा गोल दिखता,

खूबसूरत दर्पण में भी यह सजता।

प्यारा सा नाम है इसका अंडाकार,

पहचानो तुम इसे हर बार। 🥚

आओ खेलें आकृतियों का खेल,

सीख गए हम आकारों का मेल!

 

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

प्राथमिक विद्यालय रेही टोला 

रानीगंज अररिया

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