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आत्मा की अमरता-कुमारी प्रियंका वर्मा

अपने धुन में ही लगे हैं सब
किसी को किसी की सोच नहीं
समझ सको समझो ,ये जिंदगी बोझ
नहीं
आज इस रूप , कल किसमें ये
हमको इसका अफसोस नहीं।।
जैसे पुराने अम्बर त्याग, हम पहने पोशाक नयी,
वैसे ही यह जीर्ण तन त्याग, करता है प्रस्थान कही,,
कभी बालक बन हर्षाए,
कभी प्रेमी सा नित घबराए।।
कभी मां के दुग्ध का पान करे
कभी कोई कार्य महान करे
कभी पीड़ा को सहन करे,
कभी पाप का हनन करे।।
मृत्यु एक विश्राम स्थल है
जहाँ शरीर विश्राम करें,,
कभी बसंत में हर्षाए,
कभी पतझड़ बन झड़ जाए
कभी पंक्षी की गुंजार करे
कभी फूलों से श्रृंगार करे
कभी भाग्य पर इतराए
कभी करता हाय हाय
कभी पपीहे के रूप में स्वाती का इंतजार करें,
कभी चकोर के वेश में चांदनी से प्यार करें,,
कोई नहीं है इस जग में ,
जो आत्मा का संहार करे
मृत्यु एक विश्राम स्थल है
जहाँ शरीर विश्राम करें।।

कुमारी प्रियंका वर्मा
प्रधान शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय भूसहुला
डिहरी (रोहतास)

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