आज जन्मदिन आया है,
बापु की याद आया है।
जिसने गाँवों में ग्रामीणों का
ग्राम स्वराज्य का सपना देखा था,
भारत के अंतिम व्यक्ति को भी
समान न्याय-अधिकार मिले—
ऐसा सुंदर सपना देखा था।
एक आत्मनिर्भर गाँव हो अपना,
हर हाथ को सम्मान मिले,
किसी से किसी में भेदभाव न हो,
हर मन में प्रेम का दीप जले।
भारत में विभिन्न धर्मों के लोग
मिल-जुलकर प्रेम से रहें,
धर्म भले हों अनेक मगर
आत्मा भारत की एक रहे।
सत्य-अहिंसा जीवन का आधार,
शिक्षा-स्वास्थ्य पर दिया जोर,
भारत के लिए जरूरी थे
ये दोनों ही अनमोल छोर।
“भारत की आत्मा गाँवों में बसती है”
यह विश्वास हृदय में था,
गाँव आर्थिक रूप से मजबूत हों,
ऐसा उनका संकल्प प्रबल था।
स्वच्छ और स्वस्थ भारत रहे हमारा,
स्वच्छता को प्राथमिकता देते रोज,
हर गली, हर गाँव स्वच्छ हो,
हर मन में जागे नया जोश।
सभी धर्मों के लोग भाईचारे से रहें,
प्रेम की धारा बहती जाए,
नफरत की हर दीवार गिरे,
भारत एक परिवार बन जाए।
भारत विदेशी सामानों की
निर्भरता से बाहर आए,
स्वदेशी वस्त्र, लघु-कुटीर उद्योग
हर गाँव में फिर मुस्काए।
अन्याय को सहन न करते,
सत्य-अहिंसा की राह दिखाते,
सत्य के बल पर आगे बढ़कर
अंग्रेजों की बोलती बंद कराते।
आओ, इस जयंती पर हम
मिलकर एक संकल्प उठाएँ,
हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई—
सब मिल भारत को सजाएँ।
गाँधी जी की राह अपनाएँ,
उनकी अभिलाषा को साकार करें,
गाँव-शहर और गली-गली में
अहिंसा, भाईचारे का संदेश धरें।
शिक्षा का प्रकाश फैलाएँ,
स्वास्थ्य का अधिकार दिलाएँ,
स्वच्छता, ईमानदारी और सेवा से
भारत को सुंदर बनाएँ।
स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत,
भाईचारे का भारत बनाएँ,
ग्राम स्वराज्य के सपने से
गाँवों को आत्मनिर्भर बनाएँ।
आज जन्मदिन आया है,
बाबू की याद आया है।
उनके सपनों का भारत बनाना—
यही हमारा सच्चा प्रण आया है
उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक’
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
तुलसी पथ लालापुल रघुनाथपुर
अंचल-ब्रह्मपुर (श्री ब्रह्मेश्वरनाथ धाम)
जिला-बक्सर

