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।। छात्र धर्म ॥धर्मेंद्र कुमार ठाकुर।

Dharmendra Kumar Thakur

Dharmendra Kumar Thakur

।। छात्र धर्म ॥

प्रात: नित्य क्रिया से, निवृत्त पूर्ण तुम हो लो,

शीश झुका ईश्वर का, पावन मानस खोलो।

करो ईश गुणगान, शुद्ध अंत:करणों से,

आलोकित कर प्राण, भक्ति के पावन कणों से।

तज आलस अज्ञान, कर्म की राह सम्हालो,

विद्या का वरदान, बुद्धि के घट में डालो।

अब जीवन का लक्ष्य, ज्ञान का संधान ही,

छात्र धर्म का सत्य, श्रेष्ठतम अनुष्ठान ही।

ग्रंथों के हर पृष्ठ, खोलते नूतन द्वारा,

बहती जहाँ अनूप, बोध की निर्मल धारा।

कठिन साधना ठान, विघ्न सब दूर भगाओ,

विद्या पाकर राष्ट्र-हित में हाथ बटाओ।

सदा बड़ों का मान, हृदय में तुम धारो अब,

कटु वाणी को त्याग, मधुरता विस्तारो अब।

अनुशासन की शक्ति, छात्र का संबल होती,

मेहनत की हर बूँद, बनती सुंदर मोती।

समय बड़ा बलवान, एक क्षण भी मत खोना,

जाग रहा संसार, वीर तुम मत अब सोना।

लगा लक्ष्य पर ध्यान, गगन को तुम छू जाओ,

भारत माँ की कीर्ति, विश्व में तुम फैलाओ।

चरित्र ही है मूल, इसे तुम मलिन न करना,

असत्य के पथ भूल, कभी पग आगे धरना।

धैर्य और संतोष, सदा जीवन में रखना,

क्रोध-लोभ का स्वाद, भूलकर भी मत चखना।

बनो राष्ट्र के कर्ण, धरा का कष्ट मिटाओ,

अंधकार को चीर, नया इक भोर उगाओ।

ज्ञान-दीप की लौ, अमर जग में जलती हो,

सच्ची शिक्षा वही, जहाँ मानवता पलती हो।

 

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर।

प्राथमिक विद्यालय रेही टोला रानीगंज अररिया

 

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