जागो देश की युवक,
नई क्रांति का आगाज करो।
नए भारत का सृजन ,
अब तुम्हारे हाथों में है,
कुछ तो विचार करो।
हे ,भारत के युवकों कुछ तो विचार करो,
नई उमंग को फिर से अपने अंदर आगाज करो।
विवेकानंद ने युवाओं में वायु सा
वेग बहाकर,
अपना परचम विदेश में लहराया था
उनके जैसा बनकर तुम भी ,
आसमान में सूर्य- सा प्रकाश करो।
अपनी नई ऊर्जा, नई सोच
शौर्य बुध्दि, विवेक से,
निर्माण परिवर्तन सृजन विकास करो ,
ऐसी ना विकास की
पेड़, पर्वत जंगल, का ही नाश करो,
प्रकृति से न खिलवाड़ करो,
नए भारत का निर्माण करो।।
दृढ़ संकल्प, नूतन स्वप्न, नई सोच,
नई ऊर्जा लेकर शंखनाद करो।
ना रहे देश में अज्ञानता, अशिक्षा ,अन्याय भ्रष्टाचार ,अत्याचार, कहीं भी,
उठो युवक दृढ़ संकल्प करो,
गरीबी दरिद्रता तस्करी को
जड़ से नाश करो। ।
उठो, जागो ,तब तक मत रुको,
जब तक देश से गरीबी,अशिक्षा
महंगाई, भ्रष्टाचार ,अत्याचार,
गरीबी, शोषण, सांप्रदायिकता,
न मिट जाए,
तब तक तुम प्रयत्न करो।।
जय हिंद , जय भारत, जय युवा शक्ति।।
रंजना कुमारी
शिक्षिका,( JUHS khamhar)
विभूतिपूर समस्तीपुर, बिहार

