रिश्तों में है एक निराला, दोस्त हमारा।
संग हमेशा जिसका मुझको, लगता प्यारा।।
जिससे करते हम अपनी है, बातें सारी।
जिसके साथ नहीं चलती है, दुनियादारी।।
जिसके आँखों में रहता हूँ, बनकर तारा।
रिश्तों में है एक निराला, दोस्त हमारा।।०१।।
जिससे मिलकर सुख दूना हो, वही दोस्त है।
कष्टों को जो आधी कर दे, सही दोस्त है।।
बुरे वक्त में साथ खड़ा जो, बने सहारा।
रिश्तों में है एक निराला, दोस्त हमारा।।०२।।
दोस्ती दो दिल का बंधन है, हमने जाना।
स्वयं बनाकर उर बैठाया, ईश्वर माना।।
हटे न पीछे जान लुटाए, ऐसा न्यारा।
रिश्तों में है एक निराला, दोस्त हमारा।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८
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