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ई-कचरा: सजगता – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

Dharmendra Kumar Thakur

Dharmendra Kumar Thakur

ई-कचरा: सजगता – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

खराब, पुराने, बंद पड़े जो, बिजली के सामान हैं,
मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर, फ्रिज, ई-कचरे की जान हैं।
तार, बैटरी, सर्किट जिनमें, प्लग का जुड़ा नाता है,
उपयोग से बाहर हर वो पुर्जा, ई-कचरा कहलाता है।
इसमें छुपा है सीसा, पारा, कैडमियम का भंडार,
आर्सेनिक के इन विषैले तत्वों से, हांफ रहा संसार।
खुले में फेंकें या इसे जलाएं, मिट्टी-जल सड़ जाता है,
फेफड़े, त्वचा और तंत्रिका-तंत्र में, गंभीर रोग यह लाता है।
रोकें इसे, संभालें इसको, कूड़ेदान में मत फेंकें,
अधिकृत संग्रह केंद्रों की राह, सजग होकर हम देखें।
छंटाई और कतरन करके, सुरक्षित इसे खोलेंगे,
सोना, चांदी, तांबा, पैलेडियम, वैज्ञानिक विधि से खोजेंगे।
कम खरीदें, मरम्मत करवाएं, गैजेट की उम्र बढ़ाएं,
दान करें या बेचें आगे, कचरे का बोझ घटाएं।
ईपीआर का नियम कहता, निर्माता की जिम्मेदारी है,
बनाया जिसने, वही समेटे, अब सुरक्षित दुनिया हमारी है।

तकनीक की इस अंधी दौड़ में, प्रकृति को न बिसराएं,
सुख-साधन के इन मलबों से, धरती न मरुस्थल बनाएं।
आधुनिकता का यह विषैला डंक, भावी पीढ़ी को न सताए,
आओ मिलकर रीसाइकिल का, पावन संकल्प उठाएं।

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया

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