गलत कुछ खप जाने दो।
रोला छंद
आया जब परिणाम,भाग्य ने खेल बिगाड़ा।
थी दोपहरी धूप,लगी राहुल को जाड़ा।।
बैलट से भी वोट,वहाँ भी हार हुई है।
हे हो! राजकुमार,कुंद क्यों? धार हुई है।।
हारेगी सरकार, कर्म शुचिता फैलाओ।
कोयल की शुभ बोल,काक से मत मिलवाओ।।
जनता होती मूर्ख,समझ प्रयास किया है।
मोदी की सरकार,कहो क्या!नाश किया है।।
बदलेगी सरकार, गलत कुछ खप जाने दो।
उजले पर कुछ कार,अजी कुछ छप जाने दो।।
शुभ्र वस्त्र पर दाग, लगेगा निश्चित जानो।
लौटेगा फिर राज, वक्त को जब पहचानो।।
रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
सेवानिवृत शिक्षक, मध्य विद्यालय दरवेभदौर पंडारक पटना
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