Site icon पद्यपंकज

गर्मी आई-ब्यूटी कुमारी

Beauty

गर्मी आई लू बरसाई ,
सूरज की तेज तपिश ।
धरती पर छाई लू की कहर,
निकल ना पाते घर से दोपहर ।
मैदानों में है धूप की लहर ,
लेते सहारा छतों का मगर ।
चिलचिलाती धूप में सूना पड़ा डगर,
गात से बह रहा पसीना धराधर।
गर्मी की छुट्टी है मगर ,
मस्ती में बाधा है लू की कहर।
किसान निहारते गगन ,
बादल की आस में ।
धरा की प्यास बुझे,
खेतों में आए हरियाली ।
गर्मी आई बहुत सताई,
पानी के लिए तरसाई।
ठंड हवा के लिए तड़पाई,
सूरज की तेज तपिश।
धरती पर छाई लू की कहर,
गर्मी आई गर्मी आई।

ब्यूटी कुमारी
प्रधान शिक्षक
दलसिंहसराय,
समस्तीपुर

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version