विकसित भारत
हमारे देश भारत का ऐसा होगा रूप,
विश्व भर में यह रहा है, रहेगा सदा अनूप,
सड़कें, बिजली, स्वास्थ्य, हर घर में रोजगार,
शिक्षा में निरंतर विकास, हर घर हो खुशहाल,
नैतिकता, अनुशासन, हर कोई हो संस्कारी,
जन-जन के पास जिज्ञासा, हर कोई सदाचारी,
जन-जन के पास होगा अपना वैज्ञानिक दृष्टिकोण,
उच्च व तकनीकी शिक्षा से भला अछूता रहेगा कौन,
विभिन्न सूचकांकों में यह देश अव्वल आएगा,
खुशहाली के साथ प्रेम व शांति के गीत गाएगा,
धर्म, अध्यात्म, दर्शन, साहित्य, कला, विज्ञान,
सब क्षेत्र में पाएगा यह देश सदा अव्वल स्थान,
भ्रष्टाचार कहीं नहीं दिखेगा, पारदर्शिता हर जगह होगी,
सर्वत्र सामंजस्य, संतुलन दिखेगा, हर कोई कर्मयोगी,
संसद से पंचायतों तक, सेवा तीर्थ से लेकर नीचे तक कार्य ठीक ढंग से चलेगा,
विकास के मुद्दों पर होगी राजनीति, हर कोई प्रगति-पथ पर निरंतर चलेगा,
लोक-हित, देश-हित में कुछ भी करने को हर नागरिक उद्यत रहेगा,
पर्यावरण, खेल, हर क्षेत्र में अव्वल, विकसित भारत सदा सुंदर दिखेगा ।
…….गिरीन्द्र मोहन झा
विकसित भारत गिरींद्र मोहन झा

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