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“ज्ञानी ककहरा “-संतोष कुमार

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क से कबूतर हम पढ़ते हैं,
ख से खरगोश है, उजला – उजला,

ग से गमला में पौधे लगाना,
घ से घंटी जोर से बजाना ,
ड‌़ करता आराम,
क, ख, ग, घ बच्चों में भर देता है “ज्ञान” ।

च से चरखी गोल- गोल घूमता,
छ से छतरी आसमान चूमता,
ज से जंगल जीवों की जान,
झ से झंडा तिरंगा भारत की शान

च, छ , ज, झ बच्चों में भर देता है “ज्ञान” ।

ट से टमाटर रेस लगता,
ठ से ठग का बैंड बजाता,
ड से डमरू करता नाच,
ढ़ से ढोलक देता आवाज,
ण करता कुछ कुछ काम,
ट , ठ, ड , ढ बच्चों में भर देता है “ज्ञान” ।

त से तरंग पानी में उठता,
थ से थरमस का पानी ठंडा,
द से दवात की स्याही सुखी,
ध से धनुष है शिकार की भूखी,
न से नल प्यासे की जान,
त, थ, द, ध बच्चों में भर देता है “ज्ञान”।

प पतंग आसमान में उड़ती,
फ से फल गर्मी में सड़ती,
ब से बकरी खाती घास,
भ से भालू दिखाएं नाच,
म से मछली का जल है जान,
प,फ,ब,भ बच्चों में भर देता है “ज्ञान”।

य से यज्ञ पंडित करवाता,
र से रथ सारथी चलाता,
ल से लट्टू नाचे ऐसे,
व से वर्षा तेजी से बरसे,
श से शलजम का सब्जी प्यारे,
ष से षट्कोण के छ: किनारे,
स से सपेरा बीन बजाता,
ह से हल किसान चलाता,
क्ष से क्षत्रिय रक्षा करता,
त्र से त्रिशूल लंबा दिखता,
ज्ञ से ज्ञानी देता ज्ञान,
य,र,ल,व बच्चों में भर देता है “ज्ञान” ।

लेखक -:
शिक्षक – संतोष कुमार
प्राथमिक विद्यालय बेदौल गोट 
प्रखंड – पुपरी 
जिला- सीतामढ़ी 

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Santosh Kumar

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