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होली-कहमुकरी- राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

Ram Kishore Pathak

उसके आते नर्तन करती।

मन में नव भावों को गढ़ती।।

बहकाए वह मेरी बोली।

क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०१।।

आते ही उल्लास जगाए।

उपवन सरिस बदन महकाए।।

करके हर-पल हँसी-ठिठोली।

क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०२।।

अंग-अंग वह छेड़े मेरा।

जबसे उसने डाला डेरा ।।

बहक गई मैं बनकर भोली ।

क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०३।।

नैनों में वह प्रीत जगाए।

मनभावन वह गीत सुनाए।।

रंग लगाए बन हम जोली।

क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०४।।

तन महकाए मन बहकाए।

प्रीत रंग चुनरी रंगाए।।

मैं भी हाय! संग में डोली।

क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०५।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक

प्रधान शिक्षक

प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।

संपर्क – 9835232978

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