उसके आते नर्तन करती।
मन में नव भावों को गढ़ती।।
बहकाए वह मेरी बोली।
क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०१।।
आते ही उल्लास जगाए।
उपवन सरिस बदन महकाए।।
करके हर-पल हँसी-ठिठोली।
क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०२।।
अंग-अंग वह छेड़े मेरा।
जबसे उसने डाला डेरा ।।
बहक गई मैं बनकर भोली ।
क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०३।।
नैनों में वह प्रीत जगाए।
मनभावन वह गीत सुनाए।।
रंग लगाए बन हम जोली।
क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०४।।
तन महकाए मन बहकाए।
प्रीत रंग चुनरी रंगाए।।
मैं भी हाय! संग में डोली।
क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०५।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
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