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निष्पक्ष चुनाव को -जैनेन्द्र प्रसाद

Jainendra

Jainendra prasadRavi

निष्पक्ष चुनाव को
मनहरण घनाक्षरी छंद में

कुशल हो चाहे मांँझी,
चाहे नहीं चले आंँधी,
छोटा सा भी एक छेद, डूबा देता नाव को।

गोदामों में जमाखोरी,
अथवा कालाबाजारी,
हमेशा ही बढ़ा देता, अनाजों के भाव को।

जाति धर्म ऊंच-नीच,
लोभ जनता के बीच,
पिछड़ापन दर्शाता, शिक्षा के अभाव को।

प्रलोभन सौदेबाजी,
राजनीति गुटबाजी,
करता है प्रभावित, निष्पक्ष चुनाव को।

जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

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