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कलह-मनु कुमारी

Manu Raman Chetna

Manu Raman Chetna

प्रेम से बनता स्वर्ग सा घर है,कलह से बिखरता संसार।

कलह से अगर बचना है तो, नि:स्वार्थ प्रेम कर रिश्तों से यार।।

ईर्ष्या, द्वेष का जब धुंआ उठे, तब दिलों में जलती वैमत्य की आग।

नफ़रत मन से त्यागो बहना, स्नेह से खेलो घर में फाग।।

कटु वचनों से बढ़ता है यह, घर में लाता है तुफान।

पल में अपने बन जाते हैं, अनजाने अनदेखे मेहमान।।

ममता, करूणा झट से जाती,घरों में उठती ऊंची दीवार।

लोभ, मोह, तृष्णा के कारण, टूट रहा है हर घर परिवार।।

सत्य, धैर्य का दीप जले हर मन में,क्रोध का बादल छंट जाए।

प्यार से बोली बोले कोई,दो दिल फिर से जुड़ जाएं।।

समझदारी से काम लें मानव , करूणा,क्षमा ले हृदय उतार।

जीवन में आए खुशहाली, लक्ष्मी जी आएं आंगन द्वार।।

सुमति रहे जिस घर में तो, साक्षात कुबेर घर में आ जाए, 

कुमति घेर ले जब जिस घर को, 

विपत्ति दरिद्रता नाच नचाए।।

प्रभु है यह विनती ” मनु ” की , 

कलह मुक्त आलय हो मेरा।

मेरे उरपुर में हे दयानिधे, बस केवल हो तेरा हीं बसेरा।।

स्वरचित एवं मौलिक 

मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचार

राघोपुर,सुपौल

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