यह लेखनी चले निरंतर, तू कलम से प्यार कर,
अक्षर-अक्षर, शब्द-शब्द से, एक नया विस्तार कर ।
अक्षर-अक्षर गूँथ जाएँ तो शब्दमाला बन जाएगी ,
शब्दकोश की शान बढाकर, अधरों पर मुसकाएगी,
हृदय कमल खिल उठेगें, मुधुपों का गूँजार कर ।
यह लेखनी चले निरंतर, तू कलम से प्यार कर ।
काव्य कवि की कल्पना है, सुकोमल हृदय के उद्गार,
मन, प्राण में घुले हुए हैं, स्पंदन में उठती झंकार,
सोया विश्व जाग उठेगा, सिंह विजय हुंकार कर ।
यह लेखनी चले निरंतर, तू कलम से प्यार कर ।
सच्चे राष्ट्र पुरोधा बनकर नूतन युग निर्माण कर,
सर्वे भवंतु सुखिनः का मंत्र सतत् गुणगान कर,
साहित्य हो जनहित में इस पर गहन विचार कर ।
यह लेखनी चले निरंतर, तू कलम से प्यार कर ।
नूतन सृजन, अन्वेषण हो, साहित्य का मूल आधार,
युवाओं को मार्ग दिखाए, मानवता पर हो उपकार,
इंसानियत की भावना, जन-जन में संचार कर ।
यह लेखनी चले निरंतर, तू कलम से प्यार कर ।
रत्ना प्रिया
शिक्षिका (11 – 12 हिन्दी )
उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर
चंडी ,नालंदा

