Site icon पद्यपंकज

ख्वाब-राहुल कुमार रंजन 

बड़े महंगे ख्वाब नहीं मेरे,

मैं जिंदगी में सुकून चाहता हूॅं।

चमक – धमक की भीड़ नहीं,

बस अपना सा जुनून चाहता हूॅं।

ना ऊंचे महलों की आरजू है,

न शोहरत की ऊंची मीनारें।

भीड़ भरे इस शोर शहर में,

थोड़ा सा आसमान चाहता हूॅं।

थका हुआ जब लौटूं घर को,

कोई पूछे दिन कैसा था?

दो पल बैठूं चाय के संग,

बस इतना ही तो हिस्सा था।

छोटी खुशियों का खजाना हो,

मन में कोई मलाल ना हो। 

नींद गहरी, सपने हलके,

जीवन में कोई सवाल ना हो। 

बड़े महंगे ख़्वाब नहीं मेरे,

बस इतना-सा अरमान है।

सुकून भरा हो हर एक पल,

यही मेरी पहचान है।

राहुल कुमार रंजन 

प्रधानाध्यापक 

मध्य विद्यालय ओरलाहा

बड़हरा कोठी, पूर्णिया

1 Likes
Spread the love
Exit mobile version