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किनारा-रूचिका

Ruchika

किनारों पर खड़ा होकर गहराई का अंदाजा लगा नही सकते,

बिना चोट के दर्द कितना ये कहाँ कभी बता सकते।

कयास ,अंदाज ,अटकलें चाहे कितना भी लगा लें

बिना चखे भला कैसे स्वाद का कोई मजा ले,

दो किनारों का मिलना कहाँ कभी सम्भव भला,

हर असम्भव को हम सम्भव कहाँ बना सकते।

आदतें बदलने की लाख कोशिश कोई कर ले भला,

कुछ आदतें बदलना मुश्किल वह है जीवन में फ़ूला फला

उन आदतों से किनारा कोई कैसे कर सकता है

उन आदतों से पीछा जीवन में छुड़ा नही सकते।

किनारों पर खड़ा होकर गहराई का अंदाजा लगा नही सकते,

बिना चोट के दर्द कितना ये कहाँ कभी बता सकते।

रूचिका 

प्रधान शिक्षिका

राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

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