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कृष्ण का आश्वासन – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर।

Dharmendra Kumar Thakur

Dharmendra Kumar Thakur

कृष्ण का आश्वासन – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर।

 

करते चलो कर्तव्य तुम,

फल की न मन में चाह हो,

अधिकार बस है कर्म पर,

परिणाम की न पराह हो।

आसक्ति तजकर कर्म में,

जो लीन निश्चित हो रहे,

वे द्वंद्व के इस जाल से,

मुक्त भव में हो रहे।

सुख-दुःख अथवा लाभ-हानि,

जय-पराजय एक हो,

विचलित न होवे मन कभी,

भीतर जगा यह विवेक हो।

योगेश्वर श्रीकृष्ण का,

यह मंत्र जीवन में ढले,

‘समत्व ही है योग’ सच्चा,

राह जो इस पर चले।

तज धर्म सारे पार्थ तुम,

बस एक मेरी शरण आ,

मैं मुक्त कर दूँगा तुम्हें,

हर पाप और हर त्रास से।

यह अंत का आश्वासन,

प्रभु का परम पावन वचन,

भयमुक्त होकर जीव तब,

करता प्रभु का ही भजन।

त्यागो सभी संशय विकल,

मन को यमन के राग में,

अर्पित करो सर्वस्व अपना,

भक्ति के अनुराग में।

गीता-सुधा का सार यह,

हर कष्ट का उपचार है,

कर्तव्य पथ पर बढ़ चलो,

यह सृष्टि का आधार है।

 

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर।

प्राथमिक विद्यालय रेही टोला 

रानीगंज अररिया

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