पढ़ा है मैंने पुस्तकों में, तुम शक्ति की प्रतिमूर्ति हो,
दीन-दुखियों की रखवाली, करुणा की तुम मूर्ति हो।
नवरात्र की राह निहारते, कितने आँसू बह गए,
आज तुम्हें सम्मुख पाने को, मन के भाव उमड़ गए।
व्रत रखा है तेरे लिए माँ, श्रद्धा के कुछ फूल लिए,
धूप-नारियल भले न लाया, अश्रु भरे दो नयन लिए।
निर्धन हूँ, पर भक्त तुम्हारा, इतनी मेरी पहचान,
मेरे भावों को समझो मैया, यही मेरा सम्मान।
सुनी है तेरी महिमा मैया, दुर्गा सप्तशती की गाथा,
देवों के संकट हरने वाली, तू जग की भाग्य-विधाता।
मेरे भी संकट हर लो मैया, राह सही दिखलाना,
भूल करूँ तो क्षमा कर देना, प्रेम से मुझे समझाना।
नहीं चाहिए धन-दौलत माँ, न वैभव और मान,
दिव्य दृष्टि देकर मैया, कर दो जीवन कल्याण।
प्रत्यक्ष नहीं तो स्वप्नों में ही, दर्शन देने आना,
मन की सारी व्यथा सुनकर, मुझको गले लगाना।
माँ! मुझे अपना पुत्र बना लो, इतना-सा वरदान,
तेरे चरणों में मिल जाए, मुझको थोड़ा स्थान।
तेरी ममता बनी रहे माँ, तेरा नाम पुकारूँ,
जन्म-जन्म तक हे जगदम्बे, तुझको ही निहारूँ।
जय माता दी!
स्वरचित मौलिक, रचनाकार:-
उमेश कुमार सिन्हा ” निर्देशक”
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
बिहार सरकार द्वारा पूर्णतः स्वीकृत विद्यालय
गोस्वामी तुलसीदास पथ लालापुल रघुनाथपुर
अंचल- ब्रह्मपुर ( श्री ब्रह्मेश्वरनाथ धाम)
जिला – बक्सर

