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मैं एक बिखरी दास्तान हूँ-पुनम कुमारी

Punam Kumari

Punam Kumari

 

मैं एक बिखरी दास्तान हूँ,

कुछ अधूरे ख़्वाबों का नाम हूँ।

कभी हँसी में छुपा दर्द हूँ,

कभी ख़ामोशी में बयां पैगाम हूँ।

 

जो मिला, उसे अपना समझा,

जो गया, उसे भी मुस्कुराकर जाने दिया।

कुछ रिश्ते दिल में रह गए,

कुछ ने दिल से ही किनारा कर लिया।

 

मेरी आँखों में कई मौसम हैं,

कभी बारिश, कभी धूप, कभी शाम हूँ।

लोग पढ़ते हैं मुझे अपने-अपने ढंग से,

मैं खुद ही अपनी अनकही किताब हूँ।

 

टूटकर भी बिखरी नहीं पूरी तरह,

हर टुकड़े में एक अरमान हूँ।

हाँ, मैं एक बिखरी दास्तान हूँ,

मगर आज भी अपनी पहचान हूँ।

 

 पुनम कुमारी

उच्च माध्यमिक विद्यालय, करजा

प्रखंड – शाहपुर

जिला – भोजपुर

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