पद्यपंकज हौसला मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ — पुनम कुमारी

मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ — पुनम कुमारी



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मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ

मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ,
खामोशी में कुछ कहती हूँ।
आँखों में सपनों की दुनियाँ,
दिल में लेकर चलती हूँ।

कितने तूफ़ान आए जीवन में,
कितने काँटे मिले पथ में,
फिर भी अपनी राह बनाकर,
हर मुश्किल से लड़ती हूँ।

आँसू बनकर दर्द न बहता,
मन का दीपक कभी न बुझता,
टूटूँ चाहे पल-पल लेकिन,
फिर से खुद को गढ़ती हूँ।

जिसने समझा मुझे कमजोर,
उसके आगे बनी मैं जोर।
अपने अस्तित्व की खातिर,
हर बंधन से लड़ती हूँ।

रात अँधेरी चाहे जितनी,
आशा मेरी रहती जितनी,
एक किरण की आस लिए मैं,
हर अँधियारा हरती हूँ।

मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ,
पर भीतर से प्रखर बनती हूँ।
मेरी चुप्पी मेरी ताकत,
मैं अपने स्वर में ढलती हूँ।

कल की चिंता छोड़कर आज,
बुनती हूँ सपनों का संसार।
गिरकर फिर उठना सीखा है,
मैं हर पल आगे बढ़ती हूँ।

मद्धम-मद्धम मैं जलती हूँ,
अपने जीवन की ज्योति हूँ।
हार नहीं, संघर्ष हूँ मैं—
मैं खुद अपनी शक्ति हूँ।

— पुनम कुमारी
उच्च माध्यमिक विद्यालय, करजा
प्रखंड — शाहपुर, जिला — भोजपुर, बिहार

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