मां तेरी आगोश में
मेरी खुशियों के खातिर मां बरगी डैम पर आई थी ,
बाहों में कसकर मुझपर तुम,कितना प्यार लुटाई थी।।
प्रकृति के थे सौंदर्य निराले,उसपर तेरा अनुपम
प्यार।
कर रहे थे बड़े मजे से,तेरे संग नौका विहार।।
लाईफ जैकेट तुझे मिला पर,सुरक्षा कवच मेरी तुम थी मां।
मुझे यकीं था कुछ नहीं होगा,जबतक संग में है मेरी मां।।
तेज हवा के झोंकों में जब , क्रूज फलट गया बीच मझधार।
मुझे लगाकर सीने से तुम,ढांढस देती रही हजार ।।
बीत रही होगी क्या तुझपर ,इसका मुझको है भान नहीं।
मां की ममता के जैसा जग में,ईश्वर का कोई वरदान नहीं।।
बचा सकती थी खुद को लेकिन, थी मेरी परवाह तुझे।
पानी में बह जाऊं कहीं ना, कसकर पकड़ी रहीं मुझे।।
टूट रही थी सांसें तेरी ,पर छोड़ी ना मेरा साथ।
अंत समय तक मां मेरी तुम,पकड़ के रक्खी मेरा हाथ।।
जीवन का जंग भले तुम हारी,पर तेरी ममता जीत गई।
मां तेरी आगोश में आकर, मुझे चैन की नींद मिली।।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर, सुपौल

