शीर्षक – मरती संवेदनाएं
आज इस समाज के भागमभाग में कैसी अजब दीवार बैठी है?
संवेदनाएं मर गई कुरीति और मोबाइल की स्टेटस जीत बैठी है।।
जहां इंसानियत और सद्भावना की लौ जलती थी रिश्तों में, वहां अब स्टेटस और रिल्स चलती है रिश्तों में।।
जाती और नस्ल के नाम पर यहां रिश्ते सुलगते हैं, नारी की बेबसी पर लोग हंसकर हाथ मलते हैं।।
किसी पीड़ित की भावना भूल बैठे है सब, वीडियो बनाकर वायरल करना जानते हैं सब।।
उठो देश के युवाओं इस सोई हुई चेतना को फिर जागते है, कुरीति की इस अंधेरी रात को अब दूर भगाते है।।
संवेदना का दीप हर दिल में जलाते है, एक नए और संवेदनशील समाज को फिर बनाते है।।
रानी कुमारी
नव प्राथमिक विद्यालय पासी नोनिया टोला सादिकपुर,कांटी, मुजफ्फरपुर
0 Likes

