निपुण बिहार — एक संकल्प
चलो आज फिर एक दीप जलाएँ,
हर बच्चे को आगे बढ़ाएँ।
जिसके हाथ में कलम हो प्यारी,
उसकी आँखों में हो दुनिया सारी।
नन्हे कदम हैं, सपने बड़े हैं,
ज्ञान की राह पर बच्चे खड़े हैं।
उन्हें उड़ान देना है हमें,
उनके सपनों को पंख देना है हमें।
पढ़ेगा बच्चा, बढ़ेगा बिहार,
ज्ञान से होगा रोशन संसार।
हर बच्चे का यही अधिकार
निपुण बनेगा अपना बिहार!
अक्षर-अक्षर ज्ञान सिखाएँ,
गिनती से संसार बताएँ।
खेल-खेल में सीखें बच्चे,
हँसते-हँसते आगे बढ़ें बच्चे।
शिक्षक केवल पाठ न पढ़ाएँ,
बच्चों में विश्वास जगाएँ।
हर बच्चे की क्षमता पहचानें,
उसके सपनों को पंख लगाएँ।
न गाँव पीछे, न शहर पीछे,
हर बच्चा हो ज्ञान में आगे।
हर विद्यालय बने मिसाल,
हर बच्चे के चेहरे पर हो उजाल।
हमने ठाना, कर दिखलाएँ,
निपुण बिहार हम बनाएँ।
एक-एक बच्चे की जिम्मेदारी,
यही है शिक्षक की सच्ची तैयारी।
आज हमारा छोटा प्रयास,
कल बनेगा बिहार का विकास।
ज्ञान की गंगा बहे अपार
निपुण बिहार, निपुण बिहार!
आओ मिलकर शपथ उठाएँ,
हर बच्चे को निपुण बनाएँ।
शिक्षा का दीप घर-घर जलाएँ,
नए बिहार का सपना सजाएँ।
बच्चा-बच्चा बने होशियार,
यही हमारा है संकल्प अपार।
ज्ञान, कौशल और संस्कार
निपुण बनेगा अपना बिहार!
अक्षय श्रीवास्तव
यू एम एस पहाड़पुर मकतब

