विषय -पहाड़ा।
शीर्षक -एक अंक से शुरू होता है पहाड़ जैसा पहाड़ा।
एक अंक से शुरू होता है
पहाड़ जैसा हमारा पहाड़ा,
दिखने में ये लगता बच्चो
लाल ,पीला,नीला और हरा।
इसमें लगते अंक बहुत
बँधे रहते गले में सूत,
आसमान में उड़ते हैं
जैसे पतंग हमारा।
एक अंक से—–२।
लिखते बच्चे नीचे से ऊपर
देखने में लगते हैं बड़े सुपर,
लगता है जैसे बन रहा पहाड़
इस पहाड़ में रहता बच्चों का प्यार।
लिखने समय बच्चे सोच के लिखते
जोड़ -जोड़ से इसको है पढ़ते,
इसी तरह से कम समय में
बन जाता मेरा पहाड़ा।
एक अंक से ——-२।
पहले एक से दस तक लिखते
जल्द हीं दस से सौ तक सीखते,
फिर वो छोटी उंगली से गिनकर
दो से बीस झटपट वो लिखते।
एक से शुरू होता बढ़ते क्रम
सौ से नीचे आता घटते क्रम,
जैसे सीढ़ी से ऊपर चढ़ते हम
और जैसे सीढ़ी से उतरते हम।
पहाड़ा में हीं है जोड़,घटाव, गुणा
जिसको सीखने गया शिक्षक के पास मुन्ना,
इसी तरह सीखता बच्चा हमारा
एक अंक से ——२।
नीतू रानी, विशिष्ट शिक्षिका, स्वरचित पहाड़ा कविता।
स्कूल -म०वि० रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।

