सुकून से गाने दो
जीवन का नया संगीत, मुझे गुनगुनाने दो,
बंशी बजाऊँ चैन की, सुकून से गाने दो ।
रंग खिले दीप सजे, हर कोना उजियारा हो,
अंधेरों से लड़ता रहे, वह दीप हमारा हो,
झंझावातों से लड़कर, विजय मुझे पाने दो ।
बंशी बजाऊँ चैन की, सुकून से गाने दो ।
मंजिल का रख ध्यान सदा, कर्म पथ बढ़ना होगा,
ध्येय निरंतर साध कर, क्षितिज पर चढ़ंना होगा,
मुक्तहस्त होकर मन को, मस्त खिलखिलाने दो ।
बंशी बजाऊँ चैन की, सुकून से गाने दो ।
झरनों का मधु गीत हो, नदियों का संगीत हो,
पक्षियों की उड़ान हो, शिशु की मधुर मुसकान हो,
सुख-दुःख में पलकर, हर पल आनंद उठाने दो ।
बंशी बजाऊँ चैन की, सुकून से गाने दो ।
जीवन की राहों में, काँटे मिले या फूल हों,
सीप के मोती मिले, या पथ में पड़े धूल हों,
हर मुश्किल से लड़कर, सबल मुझे बन जाने दो ।
बंशी बजाऊँ चैन की, सुकून से गाने दो ।
कोमल मन की आशा हो, मन में शुद्ध विचार हो,
छल-प्रपंच भाव नहीं, पावन एक संसार हो,
निश्चल, निर्मल भावों को, कमल-सा खिल जाने दो ।
बंशी बजाऊँ चैन की, सुकून से गाने दो ।
रत्ना प्रिया
शिक्षिका (11 – 12 हिन्दी )
उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर
चंडी ,नालंदा

