ऊँ कृष्णाय नमः
विधाता छंद
(हमारी बाँसुरी राधा)
हमारी बाँसुरी राधा,
कभी मुझसे नहीं रूठी।
किया वादा हमेशा ही,
सदा निकली शपथ झूठी।।
हृदय की बात तुमसे कह,
प्रणय की सीख दे जाता।
तुम्हारी बोल है मीठी,
कन्हैया मौन सुन आता।।
(2)
सखी तुमसे कहूँ कुछ भी,
न सीधी बात तुम करती।
व्यथित होता हिया मेरा,
मुसीबत तुम नहीं हरती।।
रहा अनुराग तुमसे ही,
विलग होकर न जी पाया।
मुझे थी चाह पाने की,
सिवा इसके न कुछ भाया।।
(3)
निशा कहती अनंता से,
रचाओ रास मधुवन में।
बिखेरी थी प्रभा शीतल,
फलित था प्रेम उपवन में।।
रही थी देख दोनों को,
कटी थी जाग कर रातें।
पढ़ाई प्रेम परिभाषा,
सुनी राधा वही बातें।।
एस.के.पूनम।
सेवानिवृत्त शिक्षक,फुलवारी शरीफ, पटना।
0 Likes

