आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ,
सुख-दुःख जीवन में आते हैं , समय निकलता जाता है ।
बचपन की फुलवारी आती , घर-आँगन महकाती है ,
सुकोमल मन की कुसुम कली , नूतन दुष्टि विकसाती है ,
स्नेह-छाँव में मातु-पिता के , शिशु हर पल मुसकाता है ,
व्यवहारिकता , नैतिकता के, साँचे में ढल पाता है ,
दिनकर बन प्रकाश की भाँति विश्व-पटल पर छाता है ।
आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ।
जीवन का अगला पड़ाव नवयौवन लेकर आता है ,
उत्साह, स्फूर्ति, मन-प्राण को, ऊर्जा से भर जाता है ,
सही दिशा में समुचित परिश्रम, मंजिल तक पहुँचाती है ,
कठिन समय में संबल देकर, लड़ना हमें सिखाती है ,
दृढ़ मनोबल, साहस संग ले, मनुज सफलता पाता है ।
आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ।
जीवन के अनुभवों का संचय, वृद्ध् काल को होता है ,
नई पीढ़ी को राह दिखाने, जो उम्र भर सँजोता है ,
सच्चे कर्मो के संचित फल ही, नाम –यश दे पाते हैं ,
झूठ-फरेब-कपट से दूरी, अच्छे दिन दिखलाते हैं ,
परमार्थ के पथ पर मानव, दीप-सा जलता जाता है ।
आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ।
सद्कर्म की महत्ता निराली, मृत्यु को अमरत्व देती है ,
यश-कीर्ति के फूल बिछाकर, शूल न चुभने देती है ,
अच्छे व बूरे कर्मो का जो, लेखा-जोखा रखते हैं ,
आदर के हैं पात्र हमेशा , सदा मधुर फल चखते हैं ,
श्रेष्ठ कर्मो के मलय पवन से, युग महकता जाता है ।
आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ।
रत्ना प्रिया
शिक्षिका (11 – 12 हिन्दी )
उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर
चंडी ,नालंदा

