पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik समय-रत्ना प्रिया

समय-रत्ना प्रिया


Ratna Priya

आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ,

सुख-दुःख जीवन में आते हैं , समय निकलता जाता है ।

 

बचपन की फुलवारी आती , घर-आँगन महकाती है ,

सुकोमल मन की कुसुम कली , नूतन दुष्टि विकसाती है ,

स्नेह-छाँव में मातु-पिता के , शिशु हर पल मुसकाता है ,

व्यवहारिकता , नैतिकता के, साँचे में ढल पाता है ,

दिनकर बन प्रकाश की भाँति विश्व-पटल पर छाता है ।

आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ।

 

जीवन का अगला पड़ाव नवयौवन लेकर आता है ,

उत्साह, स्फूर्ति, मन-प्राण को, ऊर्जा से भर जाता है ,

सही दिशा में समुचित परिश्रम, मंजिल तक पहुँचाती है ,

कठिन समय में संबल देकर, लड़ना हमें सिखाती है ,

दृढ़ मनोबल, साहस संग ले, मनुज सफलता पाता है ।

आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ।

 

जीवन के अनुभवों का संचय, वृद्ध् काल को होता है ,

नई पीढ़ी को राह दिखाने, जो उम्र भर सँजोता है ,

सच्चे कर्मो के संचित फल ही, नाम –यश दे पाते हैं ,

झूठ-फरेब-कपट से दूरी, अच्छे दिन दिखलाते हैं ,

परमार्थ के पथ पर मानव, दीप-सा जलता जाता है ।

आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ।

 

सद्कर्म की महत्ता निराली, मृत्यु को अमरत्व देती है ,

यश-कीर्ति के फूल बिछाकर, शूल न चुभने देती है ,

अच्छे व बूरे कर्मो का जो, लेखा-जोखा रखते हैं ,

आदर के हैं पात्र हमेशा , सदा मधुर फल चखते हैं ,

श्रेष्ठ कर्मो के मलय पवन से, युग महकता जाता है ।

आनंद हो या कठिन समय , हर क्षण बदलता जाता है ।

 

रत्ना प्रिया

शिक्षिका (11 – 12 हिन्दी )

उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर

चंडी ,नालंदा

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply