नमन है आज उस आत्मा को,
जो सत्य बनी, अहिंसा बोली।
जो दंड नहीं, संवाद सिखाए,
जिसने शक्ति को करूणा माना।
न हथियार उठाया उसने,
पर साम्राज्य डगमगा गए।
एक लाठी, एक दृढ़ संकल्प से,
अन्याय के सिंहासन हिल गए।
चरखा बोला—स्वावलंबन,
उपवास ने आत्मा जगा दी।
साधारण तन, असाधारण मन,
जिसने दुनिया को राह दिखा दी।
न घृणा बोई, न भय सिखाया,
हर मानव में ईश्वर देखा।
दुखियों के आँसू बने हथियार,
सत्य का पथ ही अंतिम लेखा।
आज पुण्यतिथि पर बापू को,
शत-शत नमन, शत-शत प्रणाम!
जब तक जीवित है मानवता,
तब तक जीवित रहेगा गांधी नाम।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी,राघोपुर, सुपौल
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