शहीद महाराणा प्रताप।
विषय -वीर गाथा 6.0
शीर्षक -राणा प्रताप को पढ़ लेना।
महाराणा प्रताप के पिता महाराणा उदय सिंह
माता महारानी जयवंतावाई थी,
माँ से युद्ध कौशल सीखे माँ उनकी धर्मपरायणा थी।
आठ फूट का महाराणा जब घर से निकला करते थे,
देख सामने अकबर के भी गुर्दे कांँपा करते थे।
जिसका बल पौरुष दुनिया में अव्वल और निराला था,
इक्यासी किलो का कवच था बहत्तर उसमें भाला था।
चेतक पर सवार होकर जब युद्ध भूमि में आता था,
बाबर के औलादों का डर से कपड़ा गीला हो जाता था ।
विश्वास पात्र चेतक अश्व संग
अनगिनत वो जंग लड़े,
हल्दी घाटी का युद्ध प्रसिद्ध कर
तब वो चैन की साँस लिए।
योद्धा अद्भुत शौर्य साहस
वीरता के साक्षात मूरत थे,
राजस्थान के वीर सपूत थे
नई पीढ़ी के मार्ग दर्शक थे।
राजपूती गाथा के तन पर स्वाभिमान का जेवर था,
मरते दम तक नहीं झुके वह सूर्यवंश का तेवर था।
अकबर का अट्टाहस को रोका साहस के बलबूते से,
समझौते को ठोकर मारी
जिसने अपने जूते से।
जब मुगलों ने मिर्ची डाली
पावन हल्दी घाटी में,
अग्नि पुष्प तब हुआ पल्लवित
कुंभलगढ़ की माटी में।
गिरा जहाँ पर खून वहाँ का
हरेक पत्थर अभी जिंदा है,
जिस्म नही है मगर नाम का
अक्षर -अक्षर अभी जिन्दा है।
जीवन में यह अमर कहानी
अक्षर -अक्षर गढ़ लेना,
शौर्य कभी सो जाएंँ तो
राणा प्रताप को पढ़ लेना।
नीतू रानी (वि०शि०)
स्कूल -म०वि० रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।

