शिक्षक हैं सृजनहार – डॉ. लवकेश कुमार
शिक्षक हैं सृजनहार, समाज के कर्णधार|
उनके कंँधे पर ही है, समाज का नवनिर्माण|
लाख मुसीबतों को सह कर,
बच्चों को गढ़ने का है जिम्मा,
जिन्हें बखूबी निभा रहे हैं,
सदियों से यह शिक्षक|
समाज को बदलने की भी,
रखते दिल में जजवा|
तभी तो हम रहते हैं बच्चों के दिल में,
गुरु विश्वामित्र के समान|
शिक्षादान को ही पूजा मानकर,
मानते हम बच्चों को भगवान|
सरस्वती के मंदिर के हम हैं,
पुजारी सदृश्य शिक्षक महान|
मौलिक एवं स्वरचित रचना
डॉ. लवकेश कुमार,
MD(IIAM),
उत्क्रमित मध्य विद्यालय जमुनियाँ,
प्रखंड -उदाकिशुनगंज, जिला- मधेपुरा, बिहार
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