Site icon पद्यपंकज

शिक्षक- संजय कुमार

Sanjay Kumar

उंगली पकड़कर चलते को
पकड़ना कलम सिखाते शिक्षक ।
गुंधी मिट्टी सी बचपन को
हैं मूर्त रूप ये देते शिक्षक ।
जीवन में आगे बढ़ने को
और लक्ष्य सफलता भेदन को
मार्ग दिखाते हैं शिक्षक ।
कभी रोक कर कभी टोक कर
कभी डांट कर कभी प्यार कर
काली घनी अंधेरी राह का
पथ प्रदर्शक हैं शिक्षक ।
कभी शांत और कभी धीर जो
और स्वभाव से हैं गंभीर जो
सबकी मान प्रतिष्ठा जिससे
सीखी कर्तव्य निष्ठा जिससे
जब भय हार का सामने हो
और बाधा राह का रोके हो
आशा से बड़ी निराशा हो
और प्रकाश से घना अंधेरा हो
चहुओर विषम स्थिति हो
और राह नही जब दिखते हो
तो राह दिखाते हैं शिक्षक ।

संजय कुमार ।
क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक
छपरा

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version