उंगली पकड़कर चलते को पकड़ना कलम सिखाते शिक्षक । गुंधी मिट्टी सी बचपन को हैं मूर्त रूप ये देते शिक्षक[...]
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आदमी और जंगल- संजय कुमारआदमी और जंगल- संजय कुमार
बूढ़ा बरगद रो-रोकर, यूं मुझसे कहने लगा! क्या बिगाड़ा था? क्या बिगाड़ा था हमने? कि तुम और तुम्हारी जात ने,[...]
प्रार्थना – संजय कुमारप्रार्थना – संजय कुमार
खुशियाँ न देना तू इतनी प्रभु कि दुखियों के गम पर हँसने लगूँ ऊँचाई न देना तू इतना प्रभु कि[...]
यह चिड़िया कहाँ रहेगी – संजय कुमारयह चिड़िया कहाँ रहेगी – संजय कुमार
बोलो अब मैं कहाँ रहूँगी बच्चे मेरे कहाँ रहेंगें आती है हम सब से कहने अपनी चीं चीं मधुर आवाज[...]
इस वर्ष की ईद -संजय कुमारइस वर्ष की ईद -संजय कुमार
बड़ा सुहाना है, मौसम इस माह का चेहरे के भाव बताते हैं खुशियों की रंग खेलते हिन्दू बरसाते फूल मुस्लिम[...]
एक दीया इनके नाम – संजय कुमारएक दीया इनके नाम – संजय कुमार
आइये जलाते हैं एक दीया अपने माता पिता की लम्बी आयु के लिए, जिन्होंने हम सबको सुंदर संस्कार दिए। आइये[...]
संकल्प- संजय कुमारसंकल्प- संजय कुमार
हम भी आगे आएं,आप भी आगे आएं बाल विवाह उन्मूलन हेतु,अपने कदम बढ़ाएं। कमउम्र में विवाह के,दुष्परिणाम सबों को बताएं,[...]
माँ की याद- संजय कुमारमाँ की याद- संजय कुमार
बहुत याद आती है माँ तुम्हारी अब वो आँचल कहाँ से लाऊँ, जहाँ छुपाकर हर दुख से मुझे बैठकर आपने[...]
होली – संजय कुमारहोली – संजय कुमार
कुसुम किसलय खिलते हैं कुंञ्ज उपवन वाग में कोकिल मधुर कूकते हैं आम्र मंजर वाग में आग लगते हैं पलाश[...]
रावण-एक अपराजित योद्धा – संजय कुमाररावण-एक अपराजित योद्धा – संजय कुमार
उसे घमंड था कि,मैं हूँ अपराजेय हूँ त्रिलोक विजेता। दिग,दिगंत है हमारी मुट्ठी में, पर भूल रहा था वो। अपराजित[...]
