श्रद्धा, शुचिता और सूर्य उपासना
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी सुंदर, नहाय-खाय से व्रत आरंभ,
पंचमी को खरना का प्रसाद, मिटते सारे कष्ट-प्रपंच।
षष्ठी तिथि को संध्या अर्घ्य, अस्ताचल रवि को परनाम,
सप्तमी उषा अर्घ्य देकर, पूर्ण करें सब अपने काम।
जय हो छठी मैया तुम्हारी, महिमा तेरी सबसे न्यारी।
सूर्य देव हैं साक्षात ईश्वर, ऊर्जा और आरोग्यता देते,
संतान और परिवार की सुख-हित, व्रती कठिन निर्जला रहते।
स्वच्छता, शुचिता और नियम का, पालन होता कदम-कदम,
लोक आस्था का यह अनुपम, पर्व सिखाता जीवन-धरम।
जय हो छठी मैया तुम्हारी, महिमा तेरी सबसे न्यारी।
बांस का दौरा, सूप सुहावन, गन्ने का मंडप सजता,
गागर नींबू, नारियल, केला, फल-फूलों से घाट महकता।
अदरक-हल्दी, सुथनी-सिंघाड़ा, सात्विक सब सामान चढ़ाएं,
घी-गुड़ से बना शुद्ध ठेकुआ, मैया को भोग लगाएं।
जय हो छठी मैया तुम्हारी, महिमा तेरी सबसे न्यारी।
पीला सिंदूर सजा माथे पर, जोड़े हाथ खड़े जल में,
उगते-डूबते सूर्य देव को, अर्घ्य समर्पण पल-पल में।
श्रद्धा और विश्वास से जो भी, दर पर शीश झुकाता है,
छठी मैया की कृपा से वो, मनवांछित फल पाता है।
जय हो छठी मैया तुम्हारी, महिमा तेरी सबसे न्यारी।
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर। प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया
श्रद्धा, शुचिता और सूर्य उपासना- धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

Dharmendra Kumar Thakur
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