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कोटि बधाइयां -स्नेहलता द्विवेदी

अंतरराष्ट्रीय कविता दिवस

कोटि बधाईयाँ

मानव को मानव से जोड़े,
कविता मन में मन को मोहे।
भाषा मन की कविता ही है,
कविता दिवस बधाई सोहे।

विश्व में भाषा विविध प्रवीना,
भाव सबके मन एक ही होवे।
प्रेम, रुदन ,नंदन, वन्दन सब,
कविता तो बस कविता होवे।

पहुँचे कवि, रवि से पहले,
गूढ़ रहस्य उजागर होवे।
दर्पण में जब दर्प दिखाये,
कवि समाज देश हित बोले।

कोटि रूप में कोटि वेश में,
कवि लेखनी से सबको जोड़े।
कविता सबके मन में बसती,
कवि कविता के रस मन मोहे।

देश विदेश स्वदेश अहर्निश,
कवि तो मन की बानी बोले।
प्रकृति की संगीत है कविता,
कोटि बधाईयाँ कण मन बोले।

डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘
उत्क्रमित कन्या मध्य विद्यालय शरीफगंज कटिहार

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